ग्वालियर में पहली बार भव्य स्तर पर होगा श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान, 11 जून से शुरू होंगे धार्मिक आयोजन

The grand-scale Shri 1008 Siddhachakra Mahamandal

The grand-scale 'Shri 1008 Siddhachakra Mahamandal

कार्यक्रम- डीडी नगर स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में सिद्धचक्र विधान होगा आयोजित।

मुनिश्री के सानिध्य में सिध्दचक्र महामंडल विधान 11 जून को मंगल कलश घटयात्रा के साथ होगा शुरू।

 11 से 17 जून तक सिद्धचक्र  महामंडल विधान व विश्वशांति महायज्ञ कार्यक्रम हुआ आयोजित।

ग्वालियर- दीनदयाल नगर स्थित श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर के 25 वीं स्थापना वर्ष के उपलक्ष्म में परम पूज्य मुनिश्री विद्युव सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में ओर डीडी नगर जैन समाज के तत्वधान में प्रथम बार बड़े स्तर पर 11 से 17 जून तक विधानाचार्य प्रतिष्ठाचार्य पंडित राजेंद्र जैन मगरौनी ओर सह प्रतिष्ठाचार्य अमित शास्त्री टीकमगढ़ के मार्गदर्शन मे सिद्धों की आराधना करने के लिए श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान महोत्सव एवं विश्वशांति महायज्ञ महोत्सव कार्यक्रम जैन मंदिर के ऋषि ग्वाल स्कूल परिसर में आयोजित होगा। वही मुनिश्री विद्युव सागर महाराज का मंगल प्रवेश हुआ। समाजजानो ने दीपक से आरती उताकर भव्य आगवानी की।

विधान के मुख्य संयोजक बाबूलाल जैन ने बताया कि 11 जून को प्रातः 7 बजे से जैन मंदिर से गाजे बाजे के साथ मंगल कलश यात्रा शुरू होकर मुख्य मार्गो से होती हुई वापस कार्यक्रम स्थल जैन मंदिर पहुंचेगी। जहां प्रात 8 : 00 बजे से ध्वाजारोहण कर शुभारंभ किया जाएगा। वही आचार्य निमंत्रण, इंद्र व मंडप प्रतिष्ठा, मंगल कलश स्थापन के साथ भगवान का अभिषेक, शांतिधारा के बाद मुनिश्री के प्रवचनों के बाद सिद्धचक्र महामंडल विधान में महाअर्घ्य समर्पित करेंगे। वही शाम 7 बजे से भगवान जिनेंद्र की दीपो से महाआरती, शास्त्र प्रवचन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होगे। विधान की तैयारियां  पूर्ण होने के साथ मुख्य संयोजक बाबूलाल जैन, सह संयोजक डॉ योगेश जैन विपुल जैन रजनीश जैन ओर पवन जैन के साथ समितियां गठित की गई है।

विधान ने प्रतिदिन डबल होकर चढ़ेंगे महा अर्घ्य।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन सिदचक विधान पूजन में इंद्र इन्द्राणी मंडप पर प्रथम दिन 8 अर्घ्य समर्पित के बाद दूसरे दिन 16, तीसरे दिन 32, चौथे दिन 64, पांचवें दिन 128 से छठवें दिन 256 लेकर अंतिम दिन 1024 महाअर्घ्य समर्पित करते हे।

मैना सुन्दरी ने सिद्धचक्र विधान कर पतिदेव ओर 700 लोगों कम कुष्ठरोग दूर किया था।

जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि इस सिद्धचक्र महामण्डल विधान की महिमा रानी मैना सुन्दरी और राजा श्रीपाल की पौराणिक कथा से जुड़ी हैं। मैना सुन्दरी ने सिद्धचक्र विधान की विधिपूर्वक आराधना करके ही अपने पति राजा श्रीपाल और 700 अन्य लोगों का कोढ़ (कुष्ठ) रोग दूर किया था।यह विधान आत्मा की शुद्धि, कर्मों की निर्जरा (पापों का नाश), और आध्यात्मिक उन्नति के लिए किया जाता है

सचिन जैन आदर्श कलम मो....9575360544, 7974836323